मै लिखते लिखते लिख आया .....
श्री कृष्ण गजल ......
मै लिखते लिखते लिख आया ,
इक प्रेम संदेसा लिख आया
सारी दुनिया को मैंने ,
पलभर मे पराया लिख आया !
सागर के मोती को मैंने ,
रेत का पत्थर लिख आया !!
माया और भरम के जग को ,
मै तन्हा तन्हा लिख आया !!!१!!!
मै लिखते लिखते लिख आया ,
इक प्रेम संदेसा लिख आया मै कृष्ण विरह मै लिख आया ,
मुरली की याद मै लिख आया !
गोकुल की गलियों मै लिख आया ,
वृंदावन धाम मै लिख आया !!
सूरज की किरणें लिख आया ,
मै चाँद मै सितारे लिख आया !!!२!!!
मै लिखते लिखते लिख आया ,
इक प्रेम संदेसा लिख आया
मै तेरे साथ को लिख आया ,
मै प्रेम प्रशाद को लिख आया !
मै धुप मै छाव को लिख आया ,
मै चाँद में सूरज लिख आया !!
मै नन्द का लाला लिख आया ,
गोकुल का ग्वाला लिख आया !!!
माखन की चोरी लिखा आया ,
वृन्दावन छोरी लिख आया !!!!३!!!!
मै लिखते लिखते लिख आया ,
इक प्रेम संदेसा लिख आया
मै खुद को तेरे संग लिख देता ,
एक बार मिलन की बात करे तो !
चन्दन का पानी लिख देता ,
जो चन्दन लागने तू आया !!
मै दीया का बाती लिख देता ,
जो प्रेम प्रकाश तू मन में जलाता !!!
मै दही का छाछ लिख देता ,
जो माखन खाने तू आता !!!!४!!!!
मै लिखते लिखते लिख आया ,
इक प्रेम संदेसा लिख आया
मै प्रेम तुम्हे लिखता हूँ पत्र मे ,
ये पत्र नहीं मेरा मन है !
आकर मेरी प्यास बुझादे ,
जो दर्शन की अभिलाषा है !!५!!
मै लिखते लिखते लिख आया ,
इक प्रेम संदेसा लिख आया
मै बहते बहते बह आया ,
मै प्रेम के पथ पर बह आया !
मै रमता जोगी कहलाया ,
मै बहता पानी बह आया !!६ !!
मै लिखते लिखते लिख आया ,
इक प्रेम संदेसा लिख आया
मै लिखते लिखते लिख आया ,
इक प्रेम संदेसा लिख आया !!!!!!!!!!!!..
प्रकाश द्विवेदी (प्रेम )
+918602150751




